Monday, November 21, 2011

I am but rebellious tonight. Not for any reason or cause, but just

Jalsa , Mumbai Nov 18/19 , 2011 Fri/Sat 1 : 05 AM


ये जो दिन गुज़रते जा रहे हैं , न जाने क्यूँ ऐसा लगता है जैसे कुछ गुज़रता ही नहीं है

“सुबह होती है श्याम होती है ज़िन्दगी यूँही तमाम होती है”….

अक्सर याद आती है इन शब्दों की वाणी
माँ इन्हें अपने आखरी दिनों में दोहराया करती थीं - न जाने क्यूँ
शायद उन्हें लगता था की उनके पास अब कुछ करने को नहीं है
लकिन क्यूँ ? क्यूँ वो कुछ करें
अब तो आराम करने के दिन थे , जितना उन्होंने करना था वोह तो वो कर चुकीं
हमें पढाया लिखाया बड़ा किया , इन सां बनाया , मर्द बनाया


लेकिन नाह, उनके मन में अबभी कुछ न कुछ करने का मन हमेशा लगा रहता था


चलो कहीं घूम आते हैं , बाज़ार से मिठाई या चाट खाते हैं
दिवाली की रौशनी अलग जगहों पे देखने चलते हैं
या फिर २६ जनवरी की जो धूम धाम मची हुई है उसे देखने चलते हैं


मुझमें ऐसी क्षमता नहीं
घर के कमरे में अकेले बैठ जाऊ तो चैन मिल जाये
कुछ लिखना हो , पढ़ना हो , सोचना हो , तो ठीक , वर्ना अशांति बनी रहती है


शायद कुछ बातें अपने पूज्य पिताजी से मिल गयीं , और कुछ अपनी माता से


आज भी अंग्रेजी प्रेमी परिवार के सदस्यों को दुःख होगा इसे पड़ने में
आज वो भाषा नहीं समझ पाएंगे और अनुवाद चाहेंगे
कर दूंगा मै , लेकिन आज नहीं
आज मुझे ऐसे ही रहने दीजिये


अकेला , और अपनों से कुछ दूर …

क्षमा प्रार्थी हूँ , और अमिताभ बच्चन भी हूँ ….

I am but rebellious tonight. Not for any reason or cause, but just ..

Sometimes I feel I need to be what I need to be. I hesitate to describe my state at times. I find it impersonal. Yet when I describe the matter of Aishwarya and how she went through with her delivery there were snide remarks and warnings. Nothing wrong have I done. Better to mention facts here than bear the ignominy of distorted press detail.

They warn me of dire consequences by mentioning details of the delivery or about Aishwarya. Why ? Do they have a monopoly on my family ? Are they the only ones that have an access to my personal matters ? So …

If they write and mention and talk about it, its fine ! Not the other way round ? Not acceptable. particularly when they are misreporting incorrect details !!

The softness of the smile on the ‘little one’ remains, her finger movements linger and the facial expressions attempt perhaps to say a lot more. But she shall have to wait a while before she can express them to us in a language that we understand !!

Good night dearest ones …

Amitabh Bachchan

1 comment:

  1. khuch zara ruk jane de zindagi
    chalte chalte thakan si hone lagi h............

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